31 साल पुराने मामले में पप्पू यादव गिरफ्तार, आधी रात की कार्रवाई से सियासत में हलचल
आधी रात की दस्तक!

राजनीति की बिसात पर कभी-कभी वक्त ऐसा मोड़ लेता है, जब बीते वर्षों की परछाइयाँ अचानक वर्तमान के दरवाज़े पर दस्तक देती हैं। कुछ ऐसा ही दृश्य उस रात देखने को मिला, जब 31 साल पुराने एक मामले में सांसद Pappu Yadav को आधी रात छापेमारी के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।

रात की खामोशी में पुलिस की गाड़ियों की आहट और कानून की दस्तक ने बिहार की सियासत को एक बार फिर बेचैन कर दिया। बताया जाता है कि लंबे समय से लंबित इस प्रकरण में कानूनी प्रक्रिया तेज हुई और तत्पश्चात कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ आगे की सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
सियासी गलियारों में हलचल
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही राजनीतिक गलियारों में बयानबाज़ी का दौर शुरू हो गया। समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया, तो विरोधियों ने कानून की निष्पक्ष कार्रवाई करार दिया। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक चर्चा का बाजार गर्म है।

तीन दशक पुरानी फाइल फिर खुली
यह मामला करीब तीन दशक पुराना बताया जा रहा है, जो समय की धूल में दबा हुआ था। अब जब वह फाइल फिर खुली है, तो सवाल भी उठ खड़े हुए हैं — क्या यह केवल कानूनी कार्रवाई है या इसके पीछे सियासी समीकरणों की भी कोई कहानी छिपी है?
आगे क्या?
कानूनी प्रक्रिया अपनी गति से आगे बढ़ेगी। अदालत में अगली तारीख और दलीलों के बीच यह मामला किस दिशा में जाएगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
राजनीति में वक्त कभी स्थिर नहीं रहता — कल की घटनाएँ आज की सुर्खियाँ बन जाती हैं। पप्पू यादव की यह गिरफ्तारी भी बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ गई है, जिसकी अगली पंक्तियाँ अब अदालत और सियासत, दोनों मिलकर लिखेंगी।




