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प्रशासन की लापरवाही से खतरे में सैकड़ों जानें, बंद के आदेश का खुला उल्लंघन

मौत का पुल बना नरियाना–मांगोबंदर!

जमुई | संवाददाता मंतोष सिंह

जमुई जिले के खैरा–सोनो मार्ग स्थित एनएच-333ए पर नरियाना–मांगोबंदर पुल अब “मौत का पुल” बन चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की आंखों के सामने ही इस जर्जर पुल पर धड़ल्ले से आवागमन जारी है। पुल को खतरनाक घोषित कर छोटे वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह आदेश पूरी तरह फेल साबित हो रहा है।

🚨 आदेश सिर्फ कागजों में, जमीनी हकीकत शून्य

12 फरवरी को एसडीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में साफ तौर पर सभी छोटे वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था। एनएचएआई को डायवर्जन बनाने और पुलिस को सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।

लेकिन सवाल यह है कि जब आदेश दिया गया था, तो उसका पालन क्यों नहीं हो रहा?

⚠️ जान जोखिम में डालकर गुजर रहे लोग

न तो पुल पर पुख्ता बैरिकेडिंग की गई है और न ही वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह तैयार किया गया है। नतीजा यह है कि रोजाना सैकड़ों लोग अपनी जान हथेली पर रखकर इस खतरनाक पुल को पार करने को मजबूर हैं।

🧱 पुल में दरारें, प्रशासन बना मूकदर्शक

स्थानीय ग्रामीण ऋषि कुमार सिंह का कहना है कि पुल के पिलर और स्लैब में बड़ी-बड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं।

“कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह चुप है,” उन्होंने आरोप लगाया।

❗ आखिर हादसे का इंतजार क्यों?

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रशासनिक आदेश केवल दिखावा बनकर रह गया है। मौके पर न कोई सख्ती है और न ही सुरक्षा के इंतजाम।

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?

🏗️ पहले भी टूट चुका है पुल का हिस्सा

2009 में शुरू होकर 2011 में बना यह पुल 2017 में ही कमजोर साबित हो चुका था, जब 11वें पिलर के पास स्लैब टूट गया था। इसके बाद भी केवल खानापूर्ति मरम्मत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।

🗣️ लोगों का फूटा गुस्सा

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पुल को पूरी तरह सील कर वैकल्पिक मार्ग तैयार नहीं किया जाएगा, तब तक किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

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