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अंतरजिला स्थानांतरण में विशिष्ट शिक्षकों की उपेक्षा, 17 हज़ार अब भी वंचित : इन्तेखाब आलम

अंतरजिला स्थानांतरण में विशिष्ट शिक्षकों की उपेक्षा, 17 हज़ार अब भी वंचित : इन्तेखाब आलम

पटना।
बिहार में एक बार फिर बड़ी संख्या में शिक्षक असमंजस और मायूसी की स्थिति में हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सदस्य एवं वरिष्ठ नेता इन्तेखाब आलम ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की अस्थिर नीतियों तथा बार-बार बदलते फैसलों की वजह से 17 हज़ार से अधिक शिक्षक, खासकर सक्षमता परीक्षा पास विशिष्ट शिक्षक, आज तक अंतरजिला स्थानांतरण का लाभ पाने से वंचित हैं।

मुख्यमंत्री पर भरोसा तोड़ने का आरोप

इन्तेखाब आलम ने कहा कि विशिष्ट शिक्षकों ने कठिन परीक्षा पास कर गृह ज़िला पाने का अधिकार अर्जित किया था। उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी आश्वासन दिया था कि ऐसे शिक्षकों को प्राथमिकता मिलेगी। लेकिन अचानक नियम बदलकर इस वादे को दरकिनार कर दिया गया। आलम के मुताबिक, इससे शिक्षक समाज में गहरा आक्रोश और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री द्वारा पहले किया गया वादा तोड़ा गया है। शिक्षकों ने मेहनत से परीक्षा पास की थी, मगर आज वही शिक्षक अनदेखी के शिकार हो रहे हैं। यह सीधा अन्याय है।”

23 सितंबर की सूची से झटका

कांग्रेस नेता ने बताया कि 23 सितंबर 2025 को शिक्षा विभाग ने अंतरजिला स्थानांतरण की सूची जारी की। लेकिन इस सूची से हजारों योग्य शिक्षकों का नाम हटा दिया गया। जिनका नाम शामिल नहीं हुआ, उन्हें सिर्फ एक सामान्य मोबाइल संदेश से सूचना दे दी गई।

आलम का कहना है, “लंबे समय तक इंतजार करने और कई बार आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी जब शिक्षकों का नाम सूची में नहीं आया, तो वे स्तब्ध रह गए। यह सरकार की असंवेदनशीलता दिखाता है।”

आवेदन प्रक्रिया में खामियाँ

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुनः आवेदन की प्रक्रिया में भी विसंगतियाँ रही। पहले से चुने गए तीन जिलों का विकल्प लॉक कर दिया गया और अब पास के जिलों की जगह 200–400 किलोमीटर दूर के जिलों का विकल्प दिया जा रहा है।

“घर का इकलौता बेटा, बीमार माता-पिता की देखभाल करने वाला शिक्षक… वह कैसे सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर सेवा करेगा? विभाग इसे गंभीर मसला मानने की बजाय मज़ाक बना रहा है।”

लगातार हो रही उपेक्षा

कांग्रेस नेता ने कहा कि स्थानांतरण की नीतियाँ कई बार बदली गईं — कभी सामान्य स्थानांतरण, कभी म्यूचुअल, तो कभी अंतरजिला। लेकिन हर बार विशिष्ट शिक्षकों को बाहर कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “यह सिलसिला बार-बार हो रहा है। विशिष्ट शिक्षकों का आत्मसम्मान और जीवन, दोनों ही प्रभावित हुए हैं। वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की तकलीफ सरकार समझ ही नहीं रही।”

दोहरे रवैये का आरोप

आलम ने सरकार पर भेदभाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डेढ़-दो साल पहले नियुक्त हुए टीआरई शिक्षकों को प्रोबेशन पीरियड में ही तुरंत स्थानांतरण मिल गया, जबकि वर्षों से कार्यरत और सक्षमता परीक्षा पास विशिष्ट शिक्षक अब भी इंतजार में हैं।

“नए शिक्षकों को तुरंत सुविधा और पुराने विशिष्ट शिक्षकों को लगातार उपेक्षा — यह दोहरा रवैया ही है,” उन्होंने कहा।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

इन्तेखाब आलम का मानना है कि यह उपेक्षा न सिर्फ शिक्षकों के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचा रही है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करेगी। उनका कहना है कि असुरक्षित और हताश शिक्षक पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाएंगे, जिससे बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री से अपील

कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया कि सरकार शिक्षकों की पीड़ा को गंभीरता से समझे और उन्हें न्याय दे। उन्होंने मांग की कि सक्षमता परीक्षा पास विशिष्ट शिक्षकों को उनके पहले जिला विकल्प के आधार पर स्थानांतरण का अधिकार तुरंत दिया जाए।

साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि सरकार ने शिक्षकों की मांगों को लगातार नज़रअंदाज किया, तो यह मामला आंदोलन का रूप ले सकता है। “यह अब केवल शिक्षकों का मसला नहीं, बल्कि बिहार की पूरी शिक्षा व्यवस्था का प्रश्न है,” आलम ने कहा।

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